1783 में मैं भारत की, जिसका मैं बहुत समय से भ्रमण करने की तीव्र इच्छा रख रहा था, यात्रा पर समुद्र में था, तब दिन भर के अवलोकनों की पड़ताल करने पर एक शाम मै… - Friedrich Max Müller

" "

1783 में मैं भारत की, जिसका मैं बहुत समय से भ्रमण करने की तीव्र इच्छा रख रहा था, यात्रा पर समुद्र में था, तब दिन भर के अवलोकनों की पड़ताल करने पर एक शाम मैंने पाया, कि भारत तो हमारे सामने है, फारस हमारे बाएँ है, जबकि अरब से आ रहा हवा का झोंका हमारे पीछे आ रहा था। यह स्थिति खुद में इतनी सुखद और मेरे लिए इतनी नई थी कि इसने मेरे मस्तिष्क में यादों की एक ऐसी शृंखला जगा दी,

Hindi
Collect this quote

About Friedrich Max Müller

Friedrich Max Müller (6 December 1823 – 28 October 1900), more commonly known as Max Müller (or Mueller), was a German philologist and Orientalist, who was a major pioneer of the discipline of comparative religion.

Biography information from Wikiquote

Also Known As

Native Name: Max Müller
Alternative Names: Rt. Hon. Friedrich Max Muller F. Max Müller Professor Friedrich Max-Muller F. M. M. Friedrich Maximilian Müller Max Muller
Go Premium

Support Quotewise while enjoying an ad-free experience and premium features.

View Plans

Related quotes. More quotes will automatically load as you scroll down, or you can use the load more buttons.

Additional quotes by Friedrich Max Müller

भारत के पड़ोस के कबीले जो ईरानी भाषा बोलते थे, फारसी के समान स को ह बोलते थे। इस प्रकार सिन्धु हिन्दु बन गया और जब प्राचीनकाल में ह लुप्त हो गया तो हिन्धु इन्दु बन गया। जब ग्रीक लोगों ने फारसी लोगों से पहली बार इंडिया के बारे में सुना तो वे नदी को इन्डोस और लोगों को इन्डोई कहने लगे।

PREMIUM FEATURE
Advanced Search Filters

Filter search results by source, date, and more with our premium search tools.

दरिद्र व्यक्ति सम्पन्न व्यक्ति से श्रेष्ठ रोटी खाता है : क्योंकि भूख से भोजन स्वादिष्ट होता है।

Loading...