1783 में मैं भारत की, जिसका मैं बहुत समय से भ्रमण करने की तीव्र इच्छा रख रहा था, यात्रा पर समुद्र में था, तब दिन भर के अवलोकनों की पड़ताल करने पर एक शाम मै… - Friedrich Max Müller

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1783 में मैं भारत की, जिसका मैं बहुत समय से भ्रमण करने की तीव्र इच्छा रख रहा था, यात्रा पर समुद्र में था, तब दिन भर के अवलोकनों की पड़ताल करने पर एक शाम मैंने पाया, कि भारत तो हमारे सामने है, फारस हमारे बाएँ है, जबकि अरब से आ रहा हवा का झोंका हमारे पीछे आ रहा था। यह स्थिति खुद में इतनी सुखद और मेरे लिए इतनी नई थी कि इसने मेरे मस्तिष्क में यादों की एक ऐसी शृंखला जगा दी,

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About Friedrich Max Müller

Friedrich Max Müller (6 December 1823 – 28 October 1900), more commonly known as Max Müller (or Mueller), was a German philologist and Orientalist, who was a major pioneer of the discipline of comparative religion.

Biography information from Wikiquote

Also Known As

Native Name: Max Müller
Alternative Names: Rt. Hon. Friedrich Max Muller F. Max Müller Professor Friedrich Max-Muller F. M. M.
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Additional quotes by Friedrich Max Müller

जर्मनी में जो विद्वान संस्कृत का अध्ययन करता है उसके बारे में ऐसा माना जाता है कि वह प्राचीन ज्ञान के गहरे और काले रहस्यों में दीक्षित है,

उसमें एक सौन्दर्य है जो वास्तविक है और वह है प्राकृतिक विकास और हर वस्तु के समान प्राकृतिक विकास का एक छुपा हुआ लक्ष्य था, और उसका उद्देश्य कुछ ऐसा पाठ पढ़ाना था जो सीखने योग्य है और निश्चय ही हम उसे कहीं और नहीं सीख सकते थे।

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जीवन के अत्यन्त गम्भीर क्षण होते हैं। इस क्षण में मानवता के पुराने आसान सवाल हमारे पास अपनी पूरी गहराई के साथ लौटते हैं, और हम खुद से पूछते हैं कि हम क्या हैं? पृथ्वी में यह जीवन क्यों बना है? क्या हमें यहाँ कोई विश्राम नहीं करना है और सदैव परिश्रम करते रहना है और अपने पड़ोसियों के सुख के अवशेषों पर अपने खुद के सुख का निर्माण करते रहना है? और जब हमने पृथ्वी पर अपना घर बना लिया है, जो भाप, गैस और बिजली से जितना सुविधाजनक बना सकते थे, बना लिया है तब भी हम क्या उस हिन्दू से ज्यादा सुखी हैं जो अपने आदिम घर में रहता है?

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