सब होते हुए कहीं कुछ भी तो स्पष्ट और सत्य नहीं है। यहाँ तक कि वेद के कुछ ऋषियों तथा परवर्ती वेदान्तदर्शन के माननेवाले तत्त्व-चिन्तकों ने भी स्पष्ट रूप से यह समझ लिया था कि तथ्य यही है।

I maintain then that for a study of man, or, if you like, for a study of Aryan humanity, there is nothing in the world equal in importance with the Veda. I maintain that to everybody who cares for himself, for his ancestors, for his history, or for his intellectual development, a study of Vedic literature is indispensable; and that, as an element of liberal education, it is far more important and far more improving than the reigns of Babylonian and Persian kings.

वैदिक कवि प्रतिक्षण परिवर्तनशील इस सुन्दरी उषा की, जिसे ग्रीक भाषा में इओस कहा जाता है, स्वतंत्र रूप से भी स्तुति करता है। यह उषा प्रभात की एक अत्यन्त रूपवती कुमारी कन्या है जिससे अश्विनीकुमार प्रेम करते हैं और सूर्य भी इससे प्रेम करता है, किन्तु ज्यों ही वह अपनी सुनहरी किरणों से इसके आलिंगन के लिए आगे बढ़ता है, यह तुरन्त उसकी आँखों के आगे से ओझल हो जाती है। सूर्य को हम वायु, अन्तरिक्ष, द्युलोक और पृथ्वीलोक के दिव्य व्यक्तित्वधारी के रूप में देख चुके हैं। वह सूर्य, सावित्री, पूषन और विष्णु आदि अनेक नामों से एक बार पुन: आकाश में स्थित सूर्य के रूप में अपने सम्पूर्ण व्यक्तित्व में प्रकट होता है।