हे गंगा, यमुना, सरस्वती, शुतुद्रि, परुष्णी मेरी स्तुति स्वीकार करो। हे मरुद्वरीधा अस्किनी के साथ और हे अर्गिकीया सुशोमा के साथ, मेरी स्तुति सुनो। तुम त्रिस्तमा,… - Friedrich Max Müller
" "हे गंगा, यमुना, सरस्वती, शुतुद्रि, परुष्णी मेरी स्तुति स्वीकार करो। हे मरुद्वरीधा अस्किनी के साथ और हे अर्गिकीया सुशोमा के साथ, मेरी स्तुति सुनो। तुम त्रिस्तमा, ससर्तु, कुभा, गोमती, मेहत्नू तथा क्रमु आदि अपने दाएँ बहने वाली नदियों को साथ कर अपनी यात्रा पर निकल रही हो। यह सिन्धु अपनी जगमग शानदार जलप्रवाहों को इस विशाल भू भाग में इतनी तीव्रता से प्रवाहित होती चलती है, जैसे कोई सुन्दर घोड़ी जा रही हो।
About Friedrich Max Müller
Friedrich Max Müller (6 December 1823 – 28 October 1900), more commonly known as Max Müller (or Mueller), was a German philologist and Orientalist, who was a major pioneer of the discipline of comparative religion.
Biography information from Wikiquote
Also Known As
Related quotes. More quotes will automatically load as you scroll down, or you can use the load more buttons.
Additional quotes by Friedrich Max Müller
प्रकृति में दक्षिण और उत्तर होते हैं, क्या वैसे ही मानव स्वभाव में दो गोलार्द्ध नहीं होते — एक ओर तो सक्रिय युद्धप्रिय, और राजनीतिक और दूसरी ओर पैसिव, ध्यानी और दार्शनिक। और इस समस्या के हल के लिए कोई भी साहित्य उतनी सामग्री प्रदान नहीं करता जितना वेद, जो ऋचाओं से शुरू होते हैं और उपनिषदों में खत्म होते हैं।