German-born British philologist, orientalist and indologist (1823–1900)
Friedrich Max Müller (6 December 1823 – 28 October 1900), more commonly known as Max Müller (or Mueller), was a German philologist and Orientalist, who was a major pioneer of the discipline of comparative religion.
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Native Name:
Max Müller
Alternative Names:
Rt. Hon. Friedrich Max Muller
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F. Max Müller
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Professor Friedrich Max-Muller
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F. M. M.
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Friedrich Maximilian Müller
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Max Muller
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वैदिक कवि प्रतिक्षण परिवर्तनशील इस सुन्दरी उषा की, जिसे ग्रीक भाषा में इओस कहा जाता है, स्वतंत्र रूप से भी स्तुति करता है। यह उषा प्रभात की एक अत्यन्त रूपवती कुमारी कन्या है जिससे अश्विनीकुमार प्रेम करते हैं और सूर्य भी इससे प्रेम करता है, किन्तु ज्यों ही वह अपनी सुनहरी किरणों से इसके आलिंगन के लिए आगे बढ़ता है, यह तुरन्त उसकी आँखों के आगे से ओझल हो जाती है। सूर्य को हम वायु, अन्तरिक्ष, द्युलोक और पृथ्वीलोक के दिव्य व्यक्तित्वधारी के रूप में देख चुके हैं। वह सूर्य, सावित्री, पूषन और विष्णु आदि अनेक नामों से एक बार पुन: आकाश में स्थित सूर्य के रूप में अपने सम्पूर्ण व्यक्तित्व में प्रकट होता है।
जिस आर्य को हम ग्रीक, रोमन, जर्मन, सेल्ट और स्लाव के विभिन्न चरित्रों में पाते हैं उस आर्य को यहाँ हम एकदम नए चरित्र में पाते हैं। उसके उत्तरी देशान्तरों में उसकी सक्रिय और राजनैतिक ऊर्जाएँ प्रकट होती हैं और वे उच्चतम उत्कृष्टता हासिल करती हैं। साथ ही हमें मानव चरित्र का दूसरा पहलू भी मिलता है, निष्क्रिय, ध्यानस्थ, जो भारत में सम्पूर्ण रूप से विकसित हुआ।
ऋग्वेद पढ़नेवाले प्रत्येक विद्यार्थी को आठ वर्ष तक गुरु के घर में बिताना होता है। उसे दस ग्रन्थ पढ़ने होते हैं : प्रथम, ऋग्वेद की ऋचाएँ, फिर यज्ञों का गद्य ग्रन्थ जिसे ब्राह्मण कहते हैं, फिर अरण्यक, फिर घरू समारोहों के नियमों को, और अन्त में शिक्षा, व्याकरण, कल्प, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष का अध्ययन करना पड़ता है।
प्रकृति में दक्षिण और उत्तर होते हैं, क्या वैसे ही मानव स्वभाव में दो गोलार्द्ध नहीं होते — एक ओर तो सक्रिय युद्धप्रिय, और राजनीतिक और दूसरी ओर पैसिव, ध्यानी और दार्शनिक। और इस समस्या के हल के लिए कोई भी साहित्य उतनी सामग्री प्रदान नहीं करता जितना वेद, जो ऋचाओं से शुरू होते हैं और उपनिषदों में खत्म होते हैं।