बौद्धिक गतिविधि का एक और भी क्षेत्र था जिसमें हिन्दू बहुत निष्णात थे — ध्यान और भावातीत — और यहाँ हम उनसे जीवन के कुछ गुण सीख सकते

दरिद्र व्यक्ति सम्पन्न व्यक्ति से श्रेष्ठ रोटी खाता है : क्योंकि भूख से भोजन स्वादिष्ट होता है।

I maintain then that for a study of man, or, if you like, for a study of Aryan humanity, there is nothing in the world equal in importance with the Veda. I maintain that to everybody who cares for himself, for his ancestors, for his history, or for his intellectual development, a study of Vedic literature is indispensable; and that, as an element of liberal education, it is far more important and far more improving than the reigns of Babylonian and Persian kings.

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ऋचाओं में हम अभी भी प्रारम्भिक चरण को देख सकते हैं। हम देखते हैं कि आर्य कबीले भूमि पर अधिकार कर रहे हैं और इन्द्र तथा मरुतों जैसे युद्धप्रिय देवताओं के मार्गदर्शन में कृष्णवर्णीय आदिम जातियों से और परवर्ती आर्य उपनिवेशवादियों के आक्रमणों से अपने नए आवास स्थलों की रक्षा कर रहे हैं। किन्तु युद्ध का वह काल जल्दी ही खत्म हो गया और जब लोगों की एक बड़ी आबादी अपने घरों में बस गई तो जिसे हम जाति अर्थात छोटा आभिजात्य वर्ग कहते हैं उसका सैनिक और राजनीतिक पदों पर एकाधिकार हो गया और लोगों की अधिसंख्य आबादी अपने गाँवों के सँकरी परिधि के भीतर अपने दिन बिताकर सन्तुष्ट थी। यह अधिसंख्य आबादी बाहरी दुनिया से बहुत कम सरोकार रखती थी और बिना किसी विशेष परिश्रम से प्रकृति से जो उन्हें प्राप्त होता था उनसे यह सन्तुष्ट रहती थी।

हम पढ़ते हैं कि हमारे प्रपितामह स्वर्ग में हैं, पितामह आकाश में हैं, पिता पृथ्वी में हैं। पहले आदित्यों के संग हैं, दूसरे रुद्रों के संग हैं और अन्तिम वसुओं के संग हैं।

Knowledge which has no object beyond itself is, in most cases, but a pretext for vanity. It is so easy, even for the most superficial scholar, to bring together a vast mass of information, bearing more or less remotely on questions of no importance whatsoever. The test of a true scholar is to be able to find out what is really important, to state with precision and clearness the results of long and tedious researches, and to suppress altogether lucubrations, which, though they might display the laboriousness of the writer, would but encumber his subject with needless difficulty.

जब हम कहते हैं कि वर्षा हो रही है तो उन्होंने कहा कि ‘पर्जन्य’ जल से भरे अपने पात्र को धरती पर उड़ेल रहे हैं। जब हम कहते हैं कि पौ फट रही है तो उन्होंने कहा कि उषा सुन्दरी किसी नृत्यांगना के समान अपनी कला का वैभव बिखेर रही है। हम कहते हैं अब अँधेरा हो गया तो उन्होंने कहा कि सूर्य ने अपने रथ के अश्व खोल दिए। वैदिक कवियों के लिए यह समग्र प्रकृति ही सजीव थी। उसे प्रत्येक कण-कण में देवता की उपस्थिति का अनुभव होता रहता था और उनकी उपस्थिति की इस भावना में धार्मिक एवं नैतिकता के बीज भी विद्यमान थे।

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आर्य जाति की सभ्यता में संसार के महानतम राष्ट्र यानी हिन्दू, ईरानी, ग्रीक और रोमन, स्लाव, सेल्ट और ट्यूटन आते हैं, उसके अन्तर्गत समझी जाने वाली चीजों के सच्चे प्राकृतिक कीटाणु क्या हैं। किसी व्यक्ति को अच्छा हरवाहा बनने के लिए भूगर्भशास्त्री बनने की जरूरत नहीं है

अरुण औपवेसी से उसके सम्बन्धियों ने कहा, ‘आपकी आयु काफी है, आप यज्ञ की अग्नि को स्थापित करें।’ उसने उत्तर दिया : ऐसा कहकर तुम यह कह रहे हो कि मैं अब मौन धारण कर लूँ। क्योंकि जिसने यज्ञ की अग्नि को स्थापित कर लिया है उसे असत्य नहीं बोलना चाहिए और कोई व्यक्ति तभी असत्य नहीं बोलेगा जब वह कुछ बोले ही न, अर्थात मौन रहे। उस सीमा तक सत्य में यज्ञ की अग्नि की सेवा निहित है।

यूनान और इटली के आख्यानों में भी धरती और आकाश के ऐसे ही विवाह के अनेक प्रसंग मिलते हैं। वहाँ के ऐसे प्रसंगों में एक विशेष बात यह दिखाई देती है कि वहाँ हर साल शीत ऋतु में उनमें मतभेद होता है और वसन्त ऋतु में उनके बीच समझौता होता है।

पर्जन्य और ऋभु आदि अन्य अनेक देवता भी मध्यम लोक के हैं। प्राचीन वैदिक ऋषियों ने जितने भी देवताओं की कल्पना की होगी, उनमें ये दोनों अत्यन्त सक्रिय, गतिशील और विविध रूप वाले हैं और

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आप सब वीरों में समृद्ध एवं सशक्त वीरवत्तम हैं। यत्र-तत्र सर्वत्र आपका स्तवगान होता रहता है। आप सभी अदितिसुत आदित्यों या देवताओं में अविजेय हैं। हे देव! आप हमें अपना मित्र बनाने की कृपा कीजिए।’ ‘शासक आदित्य ने इन नदियों को धरती पर प्रवाहित किया है। हे वरुण! वे आपकी आज्ञाकारी हैं। वे आपकी आज्ञा में रहती हुई निरन्तर प्रवाहित होती रहती हैं, वे कभी थकती नहीं और न अपने प्रवाह को ही कभी रोकती हैं। मानो उड़ती जा रही हों।